
एनसीसी-एचडब्ल्यू प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा ने शासन-प्रशासन को सौंपा लिखित ज्ञापन, उच्च स्तरीय जांच की मांग शासकीय भूमियों पर करोड़ों के फर्जी लोन, छत्तीसगढ़ में एनबीएफसी और निजी बैंकों का बड़ा वित्तीय खेल

ब्यूरो चिफ़- शोभा ठाकुर, छत्तीसगढ़
रायपुर (छत्तीसगढ़) के ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-बैंकिंग वित्तीय
कंपनियों (एनबीएफसीस) और निजी बैंकों द्वारा शासकीय आबादी भूमियों को अवैध रूप से बंधक बना कर करोड़ों रुपये के फर्जी लोन बांटने का एक बड़ा संगठित वित्तीय खेल सामने आया है।
इस गंभीर फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के खिलाफनेशनल कंज्यूमर काउंसिल (एनसीसी) एवं हमन दिया है। इस मामले में एनसीसी और एचडब्ल्यूओ (एनसीसी HW) के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शासन-प्रशासन को लिखित रूप में शिकायत और ज्ञापन सौंपा है।
संगठन ने मांग की है कि पीड़ित पक्ष को उचित न्याय दिलाने हेतु इस पूरे घोटाले की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, शासकीय भूमि पर जिन्होंने भी अवैध रूप से बंधक बनाकर कब्जा किया है,
उनके विरुद्ध विधि अनुसार सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि आम जनता को इस संस्थागत और मुखातिब भ्रष्टाचार से मुक्त कराया जा सके। देवेंद्र नगर स्थित प्रदेश मुख्यालय से
बयान जारी करते हुए प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा ने कहा, निजी बैंक और एनबीएफसी अधिकारियों की सांठगांठ से ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी और आबादी जमीनों
पर फर्जी लोन पास किए गए हैं। अब कर्ज वसूली के नाम पर भोले-भाले ग्रामीणों को मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
हमने शासन-प्रशासन को लिखित में देकर यह साफ कर दिया है कि इस भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि दोषियों पर तुरंत एफआईआर (फिर) दर्ज नहीं
हुई, तो हमारा न्यायालय तक लड़ाई लड़ेगा।
प्रशासन को सौंपे ज्ञापन की मुख्य मांगें
1. उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच: सरकारी जमीनों के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बांटे गए करोड़ों के लोन की उच्च स्तरीय आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) या न्यायिक जांच हो।
2.दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई: फर्जीवाड़ा करने वाले भू-माफियाओं, बैंक प्रबंधकों और ग्रामीणों को प्रताड़ित करने वाले रिकवरी एजेंटों पर तत्काल विधि अनुसार मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए।
3. शासकीय भूमि की तत्काल मुक्तिः अवैध रूप से बंधक बनाई गई सभी शासकीय आबादी भूमियों को बैंकों के अवैध नियंत्रण और दावों से तत्काल मुक्त घोषित किया जाए।
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