
भोला पठार पर मिला आस्था और इतिहास का अनमोल संगम कामाख्या देवी कुंड और भीम पांव कुंड बने श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

जिला प्रतिनिधि-यशवंत साहू, बालोद
खबर- पत्रकार धनेश बंजारे द्वारा, 30 मई
बालोद (छत्तीसगढ़):- परेगुड़ा क्षेत्र के भोला पठार में हाल ही में दो प्राचीन एवं धार्मिक महत्व के स्थलों की चर्चा पूरे क्षेत्र में तेजी से फैल रही है। स्थानीय खोजकर्ता पप्पू चंद्राकार द्वारा खोजे गए कामाख्या देवी कुंड और भीम पांव कुंड को लेकर ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। 
बताया जाता है कि घने जंगलों और प्राकृतिक पहाड़ियों के बीच स्थित ये कुंड अपनी अद्भुत संरचना और रहस्यमयी पहचान के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि कामाख्या देवी कुंड शक्ति और आस्था का प्रतीक है, वहीं भीम पांव कुंड का संबंध महाभारत काल के वीर भीम से जुड़ी जनश्रुतियों से माना जा रहा है।
क्षेत्र में इन दिनों खाटू श्याम बाबा की भक्ति की भी विशेष चर्चा हो रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा श्याम की कृपा से इस पवित्र स्थल की पहचान दूर-दूर तक पहुंच रही है। आसपास के गांवों से लोग बड़ी संख्या में दर्शन और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। 
आगामी एकादशी (11 तारीख) को यहां विशेष दर्शन एवं पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से पहुंचकर धर्म, संस्कृति और प्रकृति के इस अद्भुत संगम के दर्शन करने की अपील की है। 
भोला पठार आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और सनातन संस्कृति का नया केंद्र बनकर उभर रहा है।
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