
आंगनबाड़ी कर्मचारियों के द्वारा पत्रकारों पर गलत आरोप लगाकर फसाने की साजिश बालाघाट में जोरों पर!

अपने बचाव के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका लगाती है पत्रकारों पर गलत इल्जाम!
बालाघाट:- 30 अगस्त 2024 (न्यूज रिपोर्टर- आशीष नेवारे)
बालाघाट। किरनापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहगांव कला के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 2 का है जहां पर दिनांक 29 दिन गुरुवार को ग्रामीण क्षमता न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर मधुसूदन मारवाड़ी एवं आशीष नेवारे ने आंगनबाड़ी के कार्यकता से बच्चों की कम उपस्थिति एवं मेन्यू चार्ट के अनुसार नास्ता, भोजन बच्चों को देने पर सवाल पुछे तो समुह के अध्यक्ष की तबीयत ठीक नही होने का हवाला देते हुए 10 दिनों से बच्चों को बिस्कुट एवं सुखा पोहा- चिवड़ा देने की बात सहायिका, कार्यकर्ता एवं समुह के रसोईया द्वारा कही गई जो इन नन्हें मुन्ने बच्चों को पुरक पोषण आहार से वंचित रखा जा रहा है जिसकी जानकारी तत्काल किरनापुर महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी को
हम दोनो पत्रकारों ने दुरभाष पर दी तो अधिकारी ने भी कार्यकर्ता द्वारा विभाग को जानकारी नहीं देने पर फटकार लगाई। इस तरह हमने भी बच्चों के पोषण आहार को लेकर समझाइश दी और चले गए, इसी बात- बात पर कार्यकता ने हमारी फोटो खिंचकर जिले के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रुप में फोटो सहित पैट्रोल खर्चा के लिए पैसे मांगे जाने पर पोस्ट साझा किया। जिसकी जानकारी तत्काल हमें प्राप्त होने पर पुनः मौके पर पहुंचे और ग्राम के सरपंच महोदय के साथ आंगनबाड़ी केंद्र पर जाकर व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर की गई फोटो आरोप वाले बयान पर हमने तत्काल ग्राउंड रिपोर्ट कि न्यूज़ बनाना प्रारंभ किया तो कार्यकर्ता के द्वारा बार-बार कहा जा रहा था कि सर रहने दीजिए मैंने ऐसा नहीं सोची थी कि यह मामला इतना बड़ा होगा। मैंने अपने संघ के आदेश अनुसार अन्य व्यक्तियों के आवक-जावक पर यह खबर भेजी थी जिस पर कार्यकता ने माफी मांगकर इस पोस्ट को शेयर किए जाने पर फोटो को हटाकर लिखा कि मेरे द्वारा मैंने इसे आप लोगों को शेयर करने के लिए नहीं बोली थी मगर इस फोटो को आप कहीं शेयर ना करें क्योंकि यह मैंने आपकी जानकारी के लिए भेजी थी जिसके लिए मैं माफी चाहती हूं ।
आपको बता दें कि इस तरह के एक नहीं बल्कि अनेकों मामले है जब एक पत्रकार सरकार के योजनाओं पर सरकारी कर्मचारियों से सरकारी विभागों कि समस्याओं पर सवाल खड़े किए जाते हैं तो पत्रकारों पर आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ द्वारा सीधे पत्रकारों पर पैसे कि वसुली को लेकर फसाने की साज़िश रची जाती है, अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर देखा जाए तो ऐसों – आराम की नौकरी करते नजर आएंगे जो कभी बच्चों पर ध्यान नहीं देते । और जब पत्रकारों के द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण आहार जैसे, नास्ता, भोजन, पानी एवं पढ़ाई, बैठक व्यवस्था, समय सारणी पर जब सावल पुंछे जाते हैं तो उनकी फोटो, विडियो खिंचकर आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ग्रुप में गलत आरोप लगाकर फंसाने की साज़िश जिले में इन कर्मचारियों के द्वारा जोरों पर है जिससे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिश कि जा रही है ।
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