ग्रामीण पटेल कल्याण संघ नाराज़! प्रदेश सरकार करे पटेलों के अधिकार वापस।

लोकेशन बालाघाट प्रतिनिधि- महेंद्र सिंह उईके

बालाघाट:- जहां वर्षो से उपेक्षा का दंश झेल रहे ग्रामीण पटेल कल्याण संघ ,प्रदेश सरकार से खासा नाराज है। जिन्होंने ग्रामीण पटेलो के अधिकार समाप्त करने और उन्हें मानदेय सहित अन्य सेवाओं से मुक्त करने पर अपनी नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। जिन्होंने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ग्रामीण पटेल कल्याण संघ के बैनर तले नगर के बस स्टैंड स्थित धर्मशाला में एक बैठक का आयोजन कर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा सहित देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी पटेलों को उनके अधिकार देने, पटेलो को पूर्व में दिया गया मान सम्मान वापस दिलाने और पटेलों के महत्व को बरकरार रखते हुए उनकी समस्त मांगे जल्द से जल्द पूरी किए जाने की गुहार लगाई है। जिन्होंने वर्षो से लंबित अपनी विभिन्न मांगों को दोहराते हुए, बैठक में भोपाल पहुचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करने का भी निर्णय लिया हैं।तो वहीं उन्होंने कमिश्नर के आदेश के बावजूद भी पटेलो को पंचायत की बैठक में शामिल न करने, उनके लिए पंचायत में बैठक व्यवस्था न बनाने ,उनका नाम व मोबाइल नंबर पंचायत सूचना पटल पर दर्ज न करने पर ऐतराज जताते हुए जल्द से जल्द मांग पूरी ना होने पर आंदोलन की रणनीति बनाए जाने की चेतावनी दी है।आयोजित बैठक के दौरान ग्रामीण पटेल कल्याण संघ मध्य प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल शरणागत, जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार लिल्हारे, जिला सिवनी अध्यक्ष टेकचंद बोपचे, कोषाध्यक्ष छुड़ामन सिंह शिवहरे, तहसील अध्यक्ष उदेलाल डहारे, ओम डहारे, और बिरसा तहसील अध्यक्ष भागचंद ठाकरे सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी सदस्य व विभिन्न स्थानों से आए पटेल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इन मांगों पर की चर्चा
राजस्व की वसूली करने के पटेल को अधिकार दिए जाने, किस्त बंदी के कार्य प्रतिवर्ष पटेलों को देंने, जिन ग्रामों में ग्रामीण पटेल पद रिक्त है, उनको यथाशीघ्र भरे जाने, ग्रामीण पटेल जो पूर्व में थे, उनको यथावत रखने, भू-राजस्व संहिता की धारा 222 से 229 की अधिकार की जिम्मेदारी पटेलों को दी जाने। ग्राम पंचायत के मनोनीत पंच एवं आम सभा में पटेलो को प्रतिनिधि बनाने, कोई भी जांच पटेल के समक्ष करने, ग्रामीण पटेल को प्रतिवर्ष मानदेय के रूप में उचित पारिश्रमिक देने, ग्रामीण पटेल को वर्तमान में छत्तीसगढ़ / महाराष्ट्र / हरियाणा एवं अन्य प्रांतों में जिस प्रकार से प्रतिमाह मानदेय दिया जाता, उसी प्रकार म.प्र. के समस्त ग्राम पटेलों को मानदेय देने, संगठन में महिला एवं पुरूष कार्यकारिणी में पद अधिकारी है,जिनकी मिटिंग 2-2 माह में राजधानी भोपाल में की जाती है। संगठन के पदाधिकारियों को रूकने का साधन नहीं है, इसलिए संगठन के नाम से एक आवास मकान कार्यालय हेतु स्वीकृत कराया जाने, सहित बैठक के दौरान अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई।जिसमे सबसे प्रमुख मुद्दा सचिवो द्वारा ग्राम पंचायत में बैठक व्यवस्था ना बनाना और पटेलों को बैठक आमसभा में आमंत्रित नही करने का रहा, जिसपर पटेलों में भारी आक्रोश देखा गया है।

आज तक सरकार ने कोई भी मांग पूरी नहीं की है- शरणागत
आयोजित बैठक को लेकर की गई चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश ग्रामीण पटेल कल्याण संघ प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल शरणागत ने बताया कि हमें शासन के आदेशानुसार अधिकार नहीं मिल रहे हैं। पटेलो को पंचायत में बैठने के लिए स्थान नहीं दिया जा रहा है और ना ही पंचायत मीटिंग में या आमसभा में उन्हें बुलाया जा रहा है। पटेलो को पंचायत में कोई सम्मान भी नहीं मिल रहा है। जबकि इसके पूर्व ,कमिश्नर और शासन ने आदेशित किया था कि ग्रामीण पटेलो को पंचायत में बैठने का स्थान दिया जाए, उन्हें हर मीटिंग में बुलाया जाए।  लेकिन यह आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित है। उसका परिपालन पंचायत स्तर में नहीं हो रहा है। सचिव भी शासन के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। उसी को लेकर आज यह बैठक बुलाई गई है जिसमें पटोलो के लिए पंचायत में बैठक स्थान, नेम प्लेट, मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने सहित वर्षों से लंबित अन्य मांगों को लेकर चर्चा की जा रही है आगामी समय में इन्हीं मांगों को लेकर भोपाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें स्मरण पत्र सौपा जाएगा।

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