लांजी के अधिकांश विभागों में स्थानीय कर्मचारी दे रहे अपनी सेवाएं, जिसके कारण शासकीय कार्य हो रहे बुरी तरह प्रभावित

न्यूज रिपोर्टर- हशिना वाहने, लांजी

बालाघाट:- लांजी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लांजी में अनेक शासकीय विभाग है वहीं कुछ पदस्थ कर्मचारी स्थानीय कर्मचारियों के रूप में रह रहे हैं जिसके चलते इन कर्मचारियों के शासकीय कार्य करने में हीन हवाला करने की बात आए दिन जन चर्चा में रहती है वहीं दूसरी ओर अनेक कर्मचारी के तो लांजी में मुख्यालय भी नहीं है जो रोजाना बालाघाट से लांजी आना करते हैं ऐसी स्थिति में उचित समय पर लोगों को इन कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पता है जिसके कारण वे अपनी समस्या बताने के लिए इन कर्मचारियों का इंतजार करते नजर आते हैं तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से शासन की   जनकल्याणकारी योजनाओं को भी उचित समय पर पूर्ण करने पर विलंब होता है जिसकी नगर एवं क्षेत्र में भारी जन चर्चा चल रही है जनपद पंचायत लांजी के अधिकांश कर्मचारी बालाघाट से आना-जाना करते हैं जबकि शासन के आदेश है प्रत्येक कर्मचारीयों को अपने ड्यूटी स्थल में ही मुख्यालय बनकर रहना है लेकिन शासन के आदेशों की इन कर्मचारियों के द्वारा खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है वहीं दूसरी ओर अधिकांश स्थानीय कर्मचारी शिक्षा विभाग से भी जुड़े हुए हैं जो अपने ग्रह ग्राम से आना जाना करते हैं ऐसी स्थिति में शिक्षण कार्य भी बुरी तरह प्रभावित होता है जिसके कयास लगाए जा रहे हैं जन चर्चा यह भी है की शासन द्वारा सुबह 10:00 से अपने कर्तव्य स्थल पहुंचना है लेकिन देखने में यह आता है कि 11:00 बजे के बाद ही कर्मचारी पहुंचते हैं जबकि आम जनता को जानकारी है कि शासन के द्वारा 10:00 बजे कार्यालय खुलने के एवं कर्मचारियों के पहुंचने के जानकारी है जिसके चलते आम जनता 10:00 बजे ही शासकीय कार्यालय पहुंच जाते हैं पर यह कर्मचारी शासन द्वारा निर्धारित समय के बाद ही पहुंचते हैं जिनका आम जनता को इंतजार करने हेतु मजबूरी में समय काटना पड़ता है कहने का आशा यह है कि कुछ विभाग के कर्मचारियों के द्वारा शासन के आदेश को मजाक बनाकर अपने रवैया से बाज नहीं आ रहे हैं ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन द्वारा औपचारिक निरीक्षण करने की मांग की जा रही है ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके।
जन चर्चा यह भी है कि कई कर्मचारी एक ही जगह में कई सालों से पदस्थ है इनका स्थानांतरण आखिरकार क्यों नहीं होता एक प्रश्न चिन्ह बनकर रह गया है ऐसे कर्मचारियों की खोजबीन करके तत्काल स्थानांतरण करने की मांग की गई है।

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